वाराणसी। महिला आरक्षण बिल (131वां संशोधन) पास न होने से आक्रोशित महिलाओं ने रविवार को वाराणसी की सड़कों पर उतरकर अपना रौद्र रूप दिखाया। महिल...
वाराणसी। महिला आरक्षण बिल (131वां संशोधन) पास न होने से आक्रोशित महिलाओं ने रविवार को वाराणसी की सड़कों पर उतरकर अपना रौद्र रूप दिखाया। महिला परिषद के बैनर तले सुभाष मंदिर से लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद स्मृति द्वार तक 'बेनकाब मार्च' निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारी महिलाओं ने संसद में विरोध करने वाले दलों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और राहुल गांधी का पुतला फूंकते हुए इस्तीफे की मांग की।
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| Purvanchal Samachar |
'रोटी-पानी बंद' और घर में गृहयुद्ध की चेतावनी
प्रदर्शन का सबसे अनूठा और कड़ा पहलू वह चेतावनी रही, जो महिलाओं ने अपने ही पतियों को दी है। महिलाओं के हाथों में मौजूद पोस्टरों पर साफ लिखा था— "महिला आरक्षण नहीं मिलेगा तो, होगा रोटी-पानी बंद।" महिला परिषद की कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि उनके पतियों ने महिला विरोधी दलों या नेताओं से किसी भी तरह का संबंध रखा, तो घरों में 'किचन हड़ताल' शुरू कर दी जाएगी। यानी अब यह लड़ाई संसद से निकलकर रसोई तक पहुँच गई है।
नेताओं के व्यवहार पर बरसीं विदुषियां
बीएचयू की प्रोफेसर डॉ. मृदुला जायसवाल ने नेतृत्व करते हुए कहा कि संसद में महिलाओं को अपमानित करने वाले नेताओं को जनता कभी माफ नहीं करेगी। वहीं, डॉ. अर्चना भारतवंशी ने विरोध करने वाले नेताओं की तुलना 'दुर्योधन' और 'दुशासन' से की। डॉ. नजमा परवीन और पूनम श्रीवास्तव ने दो टूक कहा कि ये दल नहीं चाहते कि साधारण घरों की महिलाएं विधानसभा या संसद तक पहुँचें, वे हमें आज भी गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं।
